
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। UK के प्रधानमंत्री केयर स्टारमर की भारत यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर इन समझौतों को “New Era of Prosperity and Strategic Alignment” की संज्ञा दी।
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मुख्य समझौते और सहयोग के क्षेत्र
व्यापार और आर्थिक सहयोग
दोनों नेताओं ने डिजिटल व्यापार, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंस और मैरिटाइम टेक्नोलॉजी से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का लक्ष्य वर्ष 2040 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25.5 बिलियन पाउंड तक पहुंचाना है।
- भारतीय वस्तुओं जैसे टेक्सटाइल, लेदर और फूड प्रोडक्ट्स को UK में आसान पहुंच मिलेगी।
- UK की व्हिस्की, मेडिकल डिवाइसेज़ आदि को भारत में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा।
निवेश की प्रतिबद्धताएं
64 भारतीय कंपनियां UK में 1.3 बिलियन पाउंड का निवेश करेंगी।
यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, IT सेवाएं और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में होगा।
UK की कंपनियां भारत के क्लीन टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और लाइफ साइंसेज़ में निवेश करेंगी।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
दोनों देशों ने डिफेंस टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- AI आधारित मैरिटाइम सर्विलांस सिस्टम हिंद महासागर के लिए विकसित किया जाएगा।
- मेक इन इंडिया के तहत नेवल इंजन और ड्रोन का संयुक्त उत्पादन होगा।
शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी
UK प्रधानमंत्री ने भारत में ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज़ के कैंपस खोलने की घोषणा की।
2026 तक 5–6 प्रमुख कैंपस शुरू होने की संभावना है।
Mutual Recognition of Qualification Agreement (MQRA) पर हस्ताक्षर हुए हैं।
अब एक देश की डिग्री दूसरे देश में भी मान्य होगी।
प्रौद्योगिकी और नवाचार
Innovation Bridge 2.0 के तहत AI, क्लीन हाइड्रोजन और बायोटेक स्टार्टअप्स में सहयोग किया जाएगा।
UK ने भारतीय स्टार्टअप्स को 250 मिलियन पाउंड की वित्तीय सहायता देने का वादा किया है।
वीज़ा और इमिग्रेशन: एक संवेदनशील मुद्दा
UK प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ब्रिटेन भारत के साथ वीज़ा डील की तलाश नहीं कर रहा है।
इसका कारण UK में बढ़ता इमिग्रेशन दबाव बताया गया है।
क्रियान्वयन की चुनौतियां
वीडियो में कुछ प्रमुख चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया:
- FTA का रैटिफिकेशन और लागू करने की प्रक्रिया।
- नॉन-टैरिफ बाधाएं जैसे स्टैंडर्ड कंप्लायंस और जटिल कस्टम नियम।
- इमिग्रेशन तनाव और राजनीतिक मतभेद (मानवाधिकार, यूक्रेन-रूस संघर्ष)।
निष्कर्ष
भारत और UK के बीच हुए ये समझौते दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों को मजबूती देंगे। हालांकि कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन सहयोग की भावना इस साझेदारी को एक नए युग की ओर ले जा रही है।






