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इजिप्ट के शर्म अल शेख में आयोजित गाजा शांति शिखर सम्मेलन का उद्देश्य इजराइल और गाजा के बीच स्थायी शांति स्थापित करना था। यह सम्मेलन उस समय हुआ जब हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली नागरिकों को रिहा किया गया था।
वैश्विक नेताओं की भागीदारी
इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हुए।
इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यूरोप और एशिया के कई राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया।
सम्मेलन स्थल पर ‘Welcome to the Land of Peace’ जैसे बैनर लगाए गए थे, जो आयोजन के उद्देश्य को दर्शाते थे।
भारत की भूमिका और पीएम मोदी की अनुपस्थिति
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था।
हालांकि, उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने प्रतिनिधित्व किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना
- शशि थरूर जैसे नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए।
- उन्होंने इसे एक चूका हुआ अवसर बताया, जिससे भारत की भूमिका सीमित हो गई।
इजराइल और ईरान की अनुपस्थिति
सम्मेलन में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू शामिल नहीं हुए।
उनकी अनुपस्थिति को सम्मेलन की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह के रूप में देखा गया।
इजराइल के बिना शांति पर चर्चा को कई विश्लेषकों ने ‘अर्थहीन’ बताया।
ईरान को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उसने सम्मेलन में भाग लेने से इनकार कर दिया।
संभावित कारण और रणनीतिक विश्लेषण
पीएम मोदी ने शायद नेतनयाहू की अनुपस्थिति को देखते हुए सम्मेलन से दूरी बनाई।
इससे यह संकेत मिलता है कि भारत ने सम्मेलन के परिणामों की संभाव्यता को लेकर संदेह जताया।
भारत की रणनीति शायद यह रही कि जब प्रमुख पक्ष जैसे इजराइल और ईरान शामिल नहीं हैं, तो शांति वार्ता का कोई ठोस निष्कर्ष निकलना मुश्किल है।
भविष्य की दिशा
गाजा क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं।
हालांकि, इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि प्रमुख पक्षों की भागीदारी के बिना कोई भी पहल सीमित प्रभाव ही डाल सकती है।
भारत की भूमिका को लेकर भी भविष्य में स्पष्टता और सक्रियता की अपेक्षा की जा रही है।
निष्कर्ष
गाजा शांति शिखर सम्मेलन में कई वैश्विक नेताओं की भागीदारी रही, लेकिन इजराइल, ईरान और भारत के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए। भारत की ओर से सीमित प्रतिनिधित्व और नेतनयाहू की गैरमौजूदगी ने इस पहल की सफलता को सीमित कर दिया। यह सम्मेलन शांति की दिशा में एक प्रयास था, लेकिन इसकी सफलता भविष्य की भागीदारी पर निर्भर करेगी।
इस समाचार को और विस्तार से पढ़ सकते है । : NDTV – Gaza Peace Summit Coverage
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