हाल ही में भारत को एक रणनीतिक सैन्य लाभ प्राप्त हुआ है। “ऑपरेशन सिंदूरे” के दौरान पाकिस्तान द्वारा छोड़ी गई चीन निर्मित PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल फटने में विफल रही और पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में भारतीय सेना के कब्जे में आ गई।
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अब DRDO इस मिसाइल का रिवर्स इंजीनियरिंग कर रहा है, जिससे भारत के मिसाइल कार्यक्रम को नई दिशा मिल सकती है।

मिसाइल बरामदगी: एक असामान्य घटना
पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए PL-15E मिसाइल का उपयोग किया।
यह मिसाइल फटी नहीं और जमीन पर सही-सलामत गिर गई।
भारतीय सेना ने इसे कब्जे में ले लिया, जो एक दुर्लभ खुफिया अवसर है।
रिवर्स इंजीनियरिंग: DRDO का अध्ययन
तकनीक का विश्लेषण
DRDO अब इस मिसाइल के गाइडेंस सिस्टम, AESA रडार, प्रोपेलेंट और एंटी-जैमिंग तकनीक का गहन अध्ययन कर रहा है।
यह प्रक्रिया रिवर्स इंजीनियरिंग कहलाती है, जिसमें दुश्मन के हथियार की तकनीक को समझा जाता है।
इतिहास से सीख
- 1958: अमेरिका की साइडवाइंडर मिसाइल चीन के हाथ लगी थी। USSR ने उसे रिवर्स इंजीनियर कर K-13 बनाई।
- 2011: अमेरिका का स्टेल्थ ड्रोन RQ-170 ईरान में क्रैश हुआ। ईरान ने उससे अपना ड्रोन विकसित किया।
- 2022: ब्रह्मोस मिसफायर के बाद पाकिस्तान रिवर्स इंजीनियरिंग नहीं कर पाया क्योंकि मिसाइल लक्ष्य पर जाकर फट गई थी।
भारत के लिए संभावित लाभ
अस्त्र मिसाइल का उन्नयन
DRDO इस मिसाइल से मिली जानकारी का उपयोग अस्त्र मार्क 2 को बेहतर बनाने में करेगा।
तकनीक जो भारत को मिल सकती है
- AESA सीकर: PL-15E में छोटा AESA रडार है जो भारत की मिसाइल सीकर तकनीक को उन्नत बना सकता है।
- एडवांस्ड प्रोपेलेंट: इसका ईंधन मिसाइल को Mach 5 से अधिक गति देता है। अस्त्र की रेंज और स्पीड बढ़ सकती है।
- एंटी-जैमिंग: इस तकनीक से भारत की मिसाइलें दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से अधिक सुरक्षित हो सकती हैं।
- दुश्मन की कमजोरी: DRDO को यह समझने में मदद मिलेगी कि चीन-पाकिस्तान की मिसाइल को कैसे जाम या निष्क्रिय किया जाए।
🔍 प्रमुख तकनीकी तुलना
| विशेषता | PL-15E (चीन) | Astra Mk2 (भारत) |
|---|---|---|
निर्माता | China Airborne Missile Academy | DRDO (India) |
रेंज | ~145–200 किमी | ~160–200+ किमी |
गति | Mach 4–5 | Mach 4.5+ (with improved propulsion) |
| सीकर तकनीक | AESA Radar Seeker | AESA Radar Seeker (अब शामिल किया गया) |
| जैमिंग प्रतिरोध | High (anti-jamming tech) | High (co-opted from PL-15E) |
| ऑपरेटर देश | पाकिस्तान | भारत |
| स्व-नष्ट प्रणाली | नहीं (इसलिए भारत ने intact missile पाई) | हाँ (सुरक्षा के लिए) |
अंतिम विश्लेषण: रणनीतिक उपहार या चुनौती?
यह मिसाइल भारत के लिए एक “फ्री गिफ्ट” जैसी है, जो पाकिस्तान की ओर से अनजाने में मिली।
चीन इससे प्रसन्न नहीं होगा, भले ही यह एक्सपोर्ट वेरिएंट हो। उनकी तकनीक भारत के हाथ लग गई है।
वीडियो प्रस्तुतकर्ता का मानना है कि भारत जल्द ही इस मिसाइल को सफलतापूर्वक रिवर्स इंजीनियर कर लेगा।
निष्कर्ष
PL-15E मिसाइल का भारत के हाथ लगना एक दुर्लभ रणनीतिक अवसर है। DRDO के रिवर्स इंजीनियरिंग प्रयासों से अस्त्र मिसाइल कार्यक्रम को नई दिशा मिल सकती है। यह घटना भारत की रक्षा तकनीक में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
सुझाए गए लिंक
- आंतरिक लिंक: 2022 ब्रह्मोस मिसफायर घटना पर विश्लेषण
- बाहरी स्रोत: DRDO की आधिकारिक वेबसाइट







