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क्या आप भी Bihar Bhumi Survey में ‘वंशावली’ (Vanshavali) को लेकर कन्फ्यूज हैं? गांव में चर्चा है कि सरपंच का साइन चलेगा, लेकिन कुछ लोग कोर्ट के एफिडेविट की बात कर रहे हैं।
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सावधान रहें! वंशावली में एक छोटी सी गलती आपकी पुश्तैनी जमीन को सर्वे से बाहर करवा सकती है। अगर आपके दादा-परदादा के नाम जमीन है और आप उसे अपने नाम करवाना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है।
आज हम आपको स्टेप-बाय-स्टेप बताएंगे कि सही वंशावली कैसे बनाएं, फॉर्म (प्रपत्र 3) कैसे भरें और सरपंच या कोर्ट—किसका साइन असली में मान्य होगा। (नीचे भरा हुआ फॉर्म देखें)
वंशावली का फॉर्मेट (Visual Proof)

Bihar Bhumi Survey: वंशावली क्यों जरूरी है? (Why is it important?)
सर्वे में यह साबित करने के लिए कि आप ही उस जमीन के असली वारिस हैं, वंशावली सबसे अहम दस्तावेज है। इसके बिना सर्वे अधिकारी (Ameen/Kanoongo) जमीन आपके नाम पर नहीं चढ़ाएंगे।
वंशावली बनाने का सही तरीका (Step-by-Step Process)
- Step 1: प्रपत्र 3 (1) डाउनलोड करें: सबसे पहले आपको बिहार सर्वे का वंशावली फॉर्म (Form 3(1)) लेना होगा।
- Step 2: पूर्वजों का नाम: सबसे ऊपर अपने उस पूर्वज (दादा/परदादा) का नाम लिखें जिनके नाम से खतियान या जमाबंदी है।
- Step 3: जीवित और मृत वारिस: उनके नीचे उनके सभी बेटों का नाम लिखें। जो मर चुके हैं, उनके आगे ‘स्व०’ (Late) लगाएं और जो जीवित हैं, उनकी उम्र लिखें।
- Step 4: अपनी पीढ़ी तक आएं: इसी तरह चार्ट बनाते हुए अपनी पीढ़ी (अपना नाम) तक आएं।
- Step 5: हस्ताक्षर: फॉर्म के नीचे अपना हस्ताक्षर करें और घोषणा पत्र भरें।
सबसे बड़ा सवाल: सरपंच या कोर्ट – किसके साइन चाहिए? (Sarpanch vs Court)
- नियम क्या कहता है: बिहार विशेष सर्वेक्षण नियमावली के अनुसार, अगर परिवार में कोई विवाद नहीं है, तो आप स्व-घोषणा (Self-Declaration) के साथ वंशावली जमा कर सकते हैं।
- ग्राम कचहरी/सरपंच: गांव के स्तर पर सत्यापन के लिए आप वंशावली पर सरपंच (Sarpanch) या वार्ड सदस्य के हस्ताक्षर और मुहर लगवा सकते हैं। यह सर्वे शिविर में मान्य है।
- कार्यपालक दंडाधिकारी (Magistrate): अगर जमीन को लेकर भाइयों में विवाद है, तब आपको कोर्ट से प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) का एफिडेविट (Affidavit) बनवाना पड़ सकता है।
जरूरी दस्तावेज (Documents Required)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (पूर्वज का, यदि उपलब्ध हो)।
- आधार कार्ड (सभी जीवित वारिसों का)।
- जमीन की रसीद या खतियान की कॉपी।
- भरा हुआ वंशावली फॉर्म (2 प्रतियों में)।
फॉर्म रिजेक्ट क्यों होता है?” (Why Forms Get Rejected)
सावधान! वंशावली में ये 3 गलतियां कीं तो फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा
- मृत पूर्वज के नाम के आगे ‘स्व०‘ न लगाना।
- वंशावली में किसी एक वारिस (जैसे बेटियों) का नाम जानबूझकर छोड़ देना।
- काट-छांट (Overwriting) करना।
निष्कर्ष (Conclusion)
सर्वे कैंप में जाने से पहले अपनी वंशावली तैयार रखें। किसी दलाल के चक्कर में न पड़ें। वंशावली फॉर्म आप नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।
FAQ Section:
Q: वंशावली पर सरपंच का साइन जरूरी है या नहीं?
- A: सामान्य स्थिति में सरपंच/वार्ड सदस्य का साइन और मुहर मान्य है। विवाद होने पर कोर्ट का एफिडेविट लगेगा।
Q: वंशावली फॉर्म (प्रपत्र 3-1) कहां जमा करना है?
- A: यह फॉर्म अपने मौजा (गाँव) के सर्वे शिविर (Survey Camp) में अमीन या कानूनगो के पास जमा करना होगा।
Q: क्या वंशावली में विवाहित बेटियों (Married Daughters) का नाम लिखना जरूरी है?
A: जी हाँ, बिल्कुल! सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों और बिहार भूमि सर्वेक्षण कानून के तहत बेटियों का भी पैतृक संपत्ति में बराबर का हक है। अगर आप जानबूझकर बेटियों (फुआ या बहन) का नाम छुपाते हैं, तो भविष्य में आपका सर्वे रद्द (Cancel) हो सकता है और उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
Q: मेरे पास दादा-परदादा का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) नहीं है, वंशावली कैसे बनेगी?
A: घबराने की जरूरत नहीं है। अगर पूर्वज की मृत्यु बहुत साल पहले हुई है और प्रमाण पत्र नहीं है, तो ग्राम कचहरी या सरपंच द्वारा लिखित ‘मृत्यु की पुष्टि’ (Death Confirmation) मान्य होती है। आप फॉर्म में मृत्यु की तारीख ‘अनुमानित’ (जैसे- वर्ष 1980 के आसपास) भी लिख सकते हैं।
Q: अगर पट्टीदार (हि हिस्सेदार) वंशावली पर साइन करने से मना कर दें तो क्या करें?
A: यह बहुत आम समस्या है। अगर आपके चाचा या भाई साइन नहीं कर रहे हैं, तो आप ‘स्व-घोषणा’ (Self Declaration) के साथ अपनी वंशावली जमा कर दें। अमीन को बता दें कि पारिवारिक विवाद है। अमीन खुद जांच करेंगे और आपका हिस्सा आपके नाम चढ़ा देंगे। किसी के साइन न करने से आपका हक नहीं मरेगा।
Q: मैं बिहार से बाहर (परदेस) नौकरी करता हूँ, क्या मुझे वंशावली देने गांव जाना पड़ेगा?
A: कोशिश करें कि आप खुद मौजूद रहें। लेकिन अगर आना संभव नहीं है, तो आप अपने परिवार के किसी सदस्य को ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ (Power of Attorney) देकर या वंशावली फॉर्म भरकर कोरियर से भेज सकते हैं, जिसे आपका कोई रिश्तेदार शिविर में जमा करा सकता है।
Q: वंशावली फॉर्म (प्रपत्र 3) जमा करने की अंतिम तारीख क्या है?
A: वैसे तो सरकार ने कहा है कि सर्वे कर्मी आपके घर आएंगे, लेकिन शिविर (Camp) लगने के बाद जितनी जल्दी हो सके जमा कर दें। देरी करने पर आपका नाम ‘खानापुरी’ लिस्ट में छूट सकता है, जिसे बाद में सुधारने के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
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