
भारत की नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) नीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच हुआ समझौता भारत को पश्चिमी कंपनियों की मोनोपोली से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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✈️ समझौते का विवरण और उद्देश्य
HAL ने रूस की UAC कंपनी के साथ एक समझौता किया है।
इसका उद्देश्य है घरेलू यात्री जेट (Domestic Passenger Jet) का उत्पादन।
यह डील भारत को बोइंग और एयरबस पर निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में है।
मुख्य उद्देश्य:
- भारत में रीजनल जेट का उत्पादन
- सिविल एविएशन में आत्मनिर्भरता
- पश्चिमी प्रतिबंधों से सुरक्षा
🇷🇺 सुखोई सुपरजेट 100: भारत में प्रवेश

इस समझौते के तहत, रूस का सुखोई सुपरजेट 100 (SSJ100) भारत में लाया जाएगा।
पहले यह जेट 70% विदेशी कंपोनेंट्स पर निर्भर था।
अब इसे 100% स्वदेशी (Indigenous) बना दिया गया है।
रूस इसे “100% सेंक्शन प्रूफ एयरक्राफ्ट” कह रहा है।
यह जेट अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद पूरी तरह से घरेलू तकनीक पर आधारित है।
🛫 तकनीकी विशेषताएं और उपयोग
SSJ100 एक रीजनल जेट है जिसकी रेंज लगभग 3,000 कि.मी. है।
यह भारत के आंतरिक ट्रैवल और पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए उपयुक्त है।
प्रमुख विशेषताएं:
- बैठने की क्षमता: लगभग 103 यात्री
- रेंज: 3,000 किलोमीटर
- उपयोग: इंटरनल और रीजनल ट्रैवल
इसके मुकाबले, बोइंग के सबसे छोटे विमान में 160–180 सीटें होती हैं।
इससे यह जेट छोटे रूट्स के लिए अधिक उपयुक्त है।
🏭 HAL की भूमिका और असेंबली अधिकार
HAL को इस जेट को भारत में असेंबल (Assemble) करने का अधिकार मिला है।
यह भारत में विमान निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इससे देश में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
📈 भारत का एविएशन बाज़ार और व्यावसायिक अवसर
रूस ने यह कदम भारत के तेज़ी से बढ़ते एविएशन बाज़ार को ध्यान में रखकर उठाया है।
यह एक व्यावसायिक रणनीति (Profit Motive) है।
बाज़ार की स्थिति:
- भारत में एयर ट्रैवल की मांग लगातार बढ़ रही है
- घरेलू और रीजनल रूट्स पर नए विकल्पों की आवश्यकता
- HAL और UAC की साझेदारी से नए अवसर खुलेंगे
🌍 वैश्विक विमान बाज़ार में बोइंग और एयरबस का दबदबा
- – बोइंग और एयरबस पिछले कई दशकों से वाणिज्यिक विमान निर्माण के क्षेत्र में एक द्वैधाधिकार (Duopoly) बनाए हुए हैं।
- – Statista और Wikipedia के अनुसार, इन दोनों कंपनियों ने 2015 से 2024 के बीच कुल मिलाकर 13,962 विमान डिलीवर किए, जिसमें एयरबस ने 7,043 और बोइंग ने 5,312 विमान भेजे।
- – अन्य कंपनियाँ जैसे McDonnell Douglas, Lockheed Martin, Fokker आदि समय के साथ इस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो चुकी हैं।
🇮🇳 भारत-रूस समझौते की रणनीतिक अहमियत
- – HAL और रूस की UAC के बीच हुआ समझौता भारत को इस वैश्विक civil aviation मोनोपोली से बाहर निकालने की दिशा में पहला ठोस प्रयास है।
- – SJ-100 जैसे रीजनल जेट्स का भारत में निर्माण न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय मांग को भी पूरा करेगा।
- – भारत में civil aviation सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और यह डील इस ग्रोथ को एक नया आयाम दे सकती है।
✈️ प्रतिस्पर्धा और विविधता का नया दौर
- – इस साझेदारी से नए निर्माता और विकल्प वैश्विक विमान बाज़ार में प्रवेश कर सकते हैं।
- – इससे कीमतों में प्रतिस्पर्धा, टेक्नोलॉजी में नवाचार, और विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
- – SJ-100 जैसे विमान छोटे और मध्यम रूट्स के लिए उपयुक्त हैं, जो बोइंग और एयरबस के बड़े विमानों से अलग हैं।
🔄 संभावित प्रभाव
- – बाजार का 90% हिस्सा फिलहाल बोइंग और एयरबस के पास है — यह डील इस आंकड़े को बदलने की दिशा में पहला कदम है।
- – अगर भारत सफलतापूर्वक SJ-100 का उत्पादन और संचालन करता है, तो अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
- – इससे वैश्विक विमान निर्माण में बहुपक्षीयता को बढ़ावा मिलेगा।
🔚 निष्कर्ष
भारत और रूस के बीच हुआ यह समझौता सिविल एविएशन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।
यह न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक विमान बाज़ार में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगा।
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External Source: HAL और UAC समझौते पर अधिक जानकारी – The Hindu
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