उत्तर प्रदेश (UP) में हाल ही में एक घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा। किसी ने सार्वजनिक रूप से “I Love Mohammad” लिखा और देखते ही देखते सड़क पर भीड़ उमड़ आई। जगह-जगह रैली हुई, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए और अंततः मामला FIR विवाद तक पहुँच गया। इस घटना ने एक नई बहस छेड़ दी — क्या किसी को अपनी आस्था व्यक्त करने की आज़ादी नहीं है?
Thank you for reading this post. Don't forget to subscribe!
#ilovemohammad
क्या लिखा गया और क्यों इतना असरदार हुआ
“I Love Mohammad” एक साधारण वाक्य नहीं बल्कि मोहब्बत और सम्मान का इज़हार है। पैगंबर मोहम्मद (स.) पूरी दुनिया के सबसे महान इंसानों में गिने जाते हैं। उनके प्रति प्रेम और इज्ज़त जताना हर इंसान का हक़ है।
कोई भी इंसान अपने पोस्टर पर “I Love Mohammad” लिख सकता है।
इसमें किसी भी तरह की गैर-कानूनी बात नहीं है।
यह दुनिया का सबसे ज़्यादा लिया जाने वाला नाम है, जिसे रोकना या विवाद बनाना गलत है।
मेरा स्पष्ट स्टैंड
“Sabko permission hai apne mazhab se pyar karne ka. Bilkul ‘I Love Mohammad’ poster par likh sakte hain. Duniya ka sabse achhe insaan unka naam kon likhna pasand nahi karega? Agar sirf ye likhne par jail ya FIR ho jaaye to ye bilkul galat hai. Ye kisi political leader ki saazish ho sakti hai. ‘I Love Mohammad’ likhna bilkul sahi hai aur mai bhi likh raha hu — #ILoveMohammad I Love Mohammad.”
I love mohammad
सड़क पर रैली और प्रशासन की भूमिका
रैली में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं तक शामिल हुए।
जगह-जगह नारे लगे और सोशल मीडिया पर हैशटैग #ILoveMohammad वायरल हुआ।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया और ट्रैफिक डायवर्ट किया।
कानूनी पहलू — किन धाराओं का जिक्र आया
यदि कोई रैली प्रशासन की अनुमति के बिना हो और इससे सार्वजनिक शांति भंग हो, तो कानूनी धाराएँ लग सकती हैं:
IPC 141–147: Unlawful Assembly / Rioting
IPC 188: प्रशासनिक आदेश की अवहेलना
IPC 268: Public Nuisance
CrPC 144: निषेधाज्ञा लागू होने पर सभा पर रोक
Motor Vehicles Act: ट्रैफिक बाधा डालने पर कार्रवाई
FIR विवाद — असली मुद्दा
इस मामले में सबसे बड़ी बहस यह है कि — क्या “I Love Mohammad” लिखने पर FIR दर्ज करना सही था?
मेरा मानना है कि FIR दर्ज करना पूरी तरह गलत था।
यह आस्था और मोहब्बत का इज़हार है, न कि कोई अपराध।
जिन लोगों ने इस लिखावट को बहाना बनाकर FIR दर्ज करवाई — उन्होंने लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है।
सिर्फ “I Love Mohammad” लिखने पर किसी को जेल भेजना या FIR करना ग़ैर-जायज़ है। 👉 जिन्होंने इस नाम को लिखने पर FIR करवाई, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि:
यह कानून का दुरुपयोग है।
आस्था को दबाने की कोशिश है।
भविष्य में ऐसे गलत उदाहरण खड़े होंगे।
इसलिए, सरकार और प्रशासन को चाहिए कि साजिश करने वालों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत सज़ा दिलवाई जाए।
“I Love Mohammad” लिखना एक अधिकार है, मोहब्बत का इज़हार है और इसे कोई गलत नहीं ठहरा सकता। जो लोग इसे विवाद बनाने या FIR दर्ज कराने में शामिल थे — वे असल गुनहगार हैं। 👉 हमारा साफ संदेश है: