
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक वीडियो में भारत की भविष्य की भू-राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत को किसी एक देश के साथ औपचारिक गठबंधन करने के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए।
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कोई औपचारिक गठबंधन नहीं: भारत की स्वतंत्र नीति
जयशंकर का स्पष्ट मत है कि भारत को किसी भी महाशक्ति के साथ औपचारिक गठबंधन नहीं करना चाहिए।
- भारत ने पहले भी कमजोर स्थिति में रहते हुए किसी गुट से जुड़ाव नहीं किया।
- आज जब भारत मजबूत है, तो किसी एक देश पर निर्भरता का कोई औचित्य नहीं है।
रणनीतिक स्वायत्तता की आवश्यकता
जयशंकर ने रणनीतिक स्वायत्तता को वर्तमान वैश्विक व्यवस्था की मांग बताया।
मुख्य तर्क:
- दुनिया जितनी अधिक अस्थिर और अप्रत्याशित होगी, भारत को उतनी ही अधिक स्वतंत्रता की आवश्यकता होगी।
- भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए विकल्पों को खुला रखना चाहिए।
- यह नीति भारत को freedom of choices प्रदान करती है।
‘विश्व मित्र’ की अवधारणा
जयशंकर ने भारत की नीति को ‘विश्व मित्र’ बताया — यानी सभी का मित्र।
- भारत रूस से तेल खरीद जैसे आर्थिक संबंध बढ़ा रहा है।
- साथ ही अमेरिका के साथ और अन्य सुरक्षा समझौतों के माध्यम से संबंध मजबूत कर रहा है।
- यह नीति बहु-गठबंधन को दर्शाती है, जिसमें भारत सभी प्रमुख ध्रुवों से जुड़ा रहता है।
“बाड़ पर बैठना” की आलोचना
जयशंकर ने ‘बाड़ पर बैठना’ जैसे वाक्यांशों को खारिज किया।
- उनके अनुसार, स्वतंत्र चुनाव को ‘अनिर्णय’ कहना गलत है।
- यह एक रणनीति है जो भारत को किसी गुट में शामिल करने की कोशिश करती है।
- भारत को अपना स्वतंत्र स्टैंड लेना चाहिए और अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए।
निष्कर्ष
एस. जयशंकर की विचारधारा भारत की स्वतंत्र और बहु-गठबंधन रणनीति को दर्शाती है। यह नीति भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच अपने हितों की रक्षा करने की क्षमता देती है। भारत का उद्देश्य है कि वह सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे, बिना किसी एक पर निर्भर हुए।
समाचार विस्तार से : Press Information Bureau (PIB)
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