
ग्रीन पटाखे का इस्तेमाल सिर्फ दिवाली तक सीमित नहीं है। न्यू ईयर, बर्थडे पार्टी, शादी, खेलों में जीत का जश्न और क्रिसमस जैसे मौकों पर भी आतिशबाज़ियाँ छोड़ी जाती हैं।
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लेकिन दिवाली का पैमाना बड़ा होता है—देशभर में करोड़ों लोग एक साथ पटाखे जलाते हैं, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।
ऐसे में सवाल उठता है: क्या हम दिवाली को उसी उत्साह से मना सकते हैं, लेकिन प्रकृति और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाए बिना?
समाधान: ग्रीन पटाखे
ग्रीन पटाखे पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाज़ियाँ हैं जिन्हें CSIR-NEERI ने विकसित किया है।
ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30%–40% कम प्रदूषण फैलाते हैं और इनमें बैरियम, नाइट्रेट और एल्युमिनियम जैसे हानिकारक रसायन नहीं होते।
इनकी पहचान के लिए QR कोड होता है जो नकली उत्पादों से बचाता है।
प्रमुख प्रकार:
- SAFAL – कम धुआं और नियंत्रित ध्वनि।
- SWAS – गैस उत्सर्जन को कम करता है।
- STAR – जानवरों और बच्चों के लिए सुरक्षित ध्वनि स्तर।
दिवाली पर प्रदूषण की स्थिति
हर साल दिवाली के बाद दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे शहरों में AQI “hazardous” स्तर पर पहुंच जाता है।
यह बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर खतरा बनता है।
तेज़ धमाके जानवरों, पक्षियों और नवजात शिशुओं को तनाव में डालते हैं।
सरकारी दिशा-निर्देश और जन जागरूकता
कानूनी पहल और सुप्रीम कोर्ट का आदेश:
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में साफ निर्देश दिए कि पारंपरिक पटाखों से बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकना जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने सिर्फ प्रमाणित ग्रीन पटाखे के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाए जाएं, और ग्राहकों को पहचान के लिए QR Code वाली पैकिंग उपलब्ध हो।
राज्य सरकारों की भूमिका:
दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाया और ग्रीन पटाखे की बिक्री को परमिशन दी। लोकल प्रशासन त्योहार से ठीक पहले विशेष अभियान चलाता है ताकि बाजारों में नकली पटाखे ना बिकें और सिर्फ वैध उत्पाद ही उपलब्ध हों।
जन जागरूकता अभियान:
केंद्र सरकार और राज्यों ने कई माध्यमों से अभियान चलाया—
TV, रेडियो और सोशल मीडिया पर विज्ञापन
स्कूलों में पर्यावरण-अनुकूल दिवाली का संदेश
CSIR-NEERI और लोकल NGOs द्वारा वर्कशॉप एवं जागरूकता कार्यक्रम
इन प्रयासों का उद्देश्य है कि लोग दिवाली को जिम्मेदारी से मनाएं, बच्चों-बुजुर्गों की सेहत और जानवरों के हितों का भी ख्याल रखें।
निष्कर्ष
जश्न हर त्योहार का हिस्सा है—चाहे वो न्यू ईयर हो या शादी।
लेकिन दिवाली पर हमें जिम्मेदार नागरिक बनकर ऐसा तरीका अपनाना चाहिए जिससे प्रकृति, जानवरों और लोगों को नुकसान न पहुंचे।
इस बार दिवाली पर ग्रीन पटाखों से खुशियाँ मनाएं, ताकि मज़ा भी आए और नुकसान किसी को न हो।
🌐 बाहरी स्रोत:
CSIR-NEERI की आधिकारिक वेबसाइट
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